Last updated: June 29th, 2026 at 05:44 am
the-historic-procession-of-shri-shirgul-maharaj-reached-churdhar-chants-of-jai-echoed-through-the-airआस्था, श्रद्धा और हिमाचल की समृद्ध देव परंपरा का अनुपम प्रतीक श्री शिरगुल महाराज की पवित्र जातर तीसरे वर्ष की परंपरा के तहत उनकी जन्मस्थली शाया से चूड़धार धाम पहुंच गई। रविवार को हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में नौहराधार और शाया से निकली पवित्र जातरें चूड़धार में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मिलीं। यह सदियों पुरानी परंपरा आज भी पूरे श्रद्धा भाव और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। मान्यता के अनुसार प्रत्येक तीसरे वर्ष शाया और नौहराधार से निकलने वाली देव जातरें चूड़धार में संगम करती हैं। इसी परंपरा के निर्वहन के लिए रेणुका, राजगढ़ और पच्छाद क्षेत्र के नौ परगनों के हजारों श्रद्धालु शनिवार सुबह अपने-अपने क्षेत्रों से पैदल यात्रा पर निकले। दिनभर दुर्गम पहाड़ी मार्गों पर चलने के बाद श्रद्धालुओं ने बंगा पाणी, वैरभ और तीसरी नामक स्थानों पर खुले आसमान के नीचे रात्रि विश्राम किया। रातभर जंगलों के बीच देव जागरण, भजन-कीर्तन और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
रविवार सुबह नौहराधार क्षेत्र से पहुंचे श्रद्धालुओं ने तीसरी नामक स्थान पर शाया से आई देव जातर का पारंपरिक रीति-रिवाजों और वाद्य यंत्रों के साथ भव्य स्वागत किया। इसके बाद सभी नौ परगनों की देव जातरें और श्रद्धालु जयकारों के साथ चूड़धार धाम के लिए रवाना हुए। चूड़धार पहुंचने पर श्री शिरगुल महाराज का विधि-विधान से शाही स्नान कराया गया। इसके पश्चात मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जहां श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और जनकल्याण की कामना की। श्रद्धालु इसके बाद समुद्र तल से लगभग 12,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र शिवलिंग तक पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
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