Last updated: June 24th, 2026 at 05:39 am
Nirjala Vrat: A Symbol of Faith, Devotion, and Self-Controlहिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत पावन महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी को इन सभी में सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है। वर्ष 2026 में यह महापर्व 25 जून को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति साल भर की अन्य एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता है, तो केवल निर्जला एकादशी का पूर्ण श्रद्धा से पालन करने पर उसे साल भर की सभी 24 एकादशियों का लाभ मिल जाता है।
निर्जला एकादशी व्रत नियम
एकादशी व्रत के नियम के अनुसार, इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इसके लिए एकादशी से एक दिन पहले जमीन पर सोना चाहिए। साथ ही इस दिन किसी को अपशब्द भी नहीं बोलना चाहिए।
निर्जला एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को नहीं तोड़ना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी एकादशी का व्रत करती हैं। ऐसा करने से मां का व्रत खंडित हो जाता है और भगवान विष्णु अप्रसन्न होते हैं।
निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के दौरान व्रत कथा जरूर पढ़ें। निर्जला एकादशी के दिन व्रत रखें और कथा पढ़ने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
इस दिन अन्न के अलावा पानी का भी त्याग किया जाता है। सूर्योदय से लेकर अगले दिन यानी द्वादशी के दिन सूर्योदय तक अन्न और पानी नहीं पिया जाता है।
निर्जला एकादशी के दिन किसी भी तरह के तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही इस दिन खास करके चावल का सेवन न करें।
निर्जला एकादशी व्रत में पानी कब पीना चाहिए
हर वर्ष ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी मनाई जाती है। इसे सभी एकादशियों में सबसे कठोर व्रत माना जाता है। इस बार निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को है। जो लोग निर्जला एकादशी का व्रत रख रहे हैं, उन्हें एकादशी के अगले दिन 26 जून 2025 यानी द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के बाद पानी पीना चाहिए।
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