HomeHimachal Pradeshलाइसेंस प्राप्त दुकानों में ही बिकेंगे पटाखे, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

लाइसेंस प्राप्त दुकानों में ही बिकेंगे पटाखे, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

शिमला। दीपावली के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पटाखों की बिक्री और भंडारण को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। अब पटाखों
hp24newsStrict Action for Illegal Firecracker Sales in Shimla

शिमला। दीपावली के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पटाखों की बिक्री और भंडारण को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। अब पटाखों की बिक्री केवल विस्फोटक नियम, 2008 के तहत लाइसेंस प्राप्त परिसरों में ही की जा सकेगी। सड़क किनारे स्टॉल, वाहनों, अस्थायी ढांचों या अन्य अनधिकृत स्थानों पर पटाखों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पटाखों की बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण को लेकर उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में संबंधित विभागों, विक्रेताओं और सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक हुई। बैठक में उन्होंने विक्रेताओं को विस्फोटक अधिनियम, 1884, विस्फोटक नियम, 2008 और लाइसेंस की सभी शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रशासन के अनुसार विक्रेता लाइसेंस में निर्धारित सीमा से अधिक पटाखों का भंडारण नहीं कर सकेंगे। एलई-5 श्रेणी में पीईएसओ के निर्धारित प्रावधानों के तहत अधिकतम 100 किलोग्राम मैन्युफैक्चर्ड फायरवर्क्स और 500 किलोग्राम चोरसा क्रैकर्स रखने की अनुमति है। हालांकि, यह सीमा संबंधित लाइसेंस की शर्तों के अधीन होगी।

पटाखे केवल लाइसेंस प्राप्त निर्माता या अधिकृत सप्लायर से ही खरीदे जा सकेंगे। विक्रेताओं को खरीद की रसीद और सप्लायर के लाइसेंस का विवरण सुरक्षित रखना होगा। विदेशी मूल या तस्करी के पटाखों की बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध रहेगा।

दुकान में धूम्रपान और आग के स्रोत पर रोक

प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि पटाखों की दुकान भूतल पर होनी चाहिए और उसमें स्वतंत्र प्रवेश के साथ आपातकालीन निकास की उचित व्यवस्था हो। दुकानों के दरवाजे बाहर की ओर खुलने वाले होने चाहिए और अग्निशमन कर्मियों की पहुंच सुनिश्चित होनी चाहिए।

बेसमेंट या आवासीय तल के नीचे पटाखों की दुकान संचालित नहीं की जा सकेगी। दुकान के अंदर और आसपास धूम्रपान, माचिस, मोमबत्ती, दीपक अथवा किसी अन्य खुले आग के स्रोत का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही विद्युत वायरिंग सुरक्षित और उचित रूप से संरक्षित होना अनिवार्य होगा।

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