HomeHimachal Pradeshअब पांवटा के कार्यकर्ताओं से बात करेंगे CM सुक्खू

अब पांवटा के कार्यकर्ताओं से बात करेंगे CM सुक्खू

सरकार और संगठन की जुगलबंदी कांग्रेस के मिशन रिपीट की राह हिमाचल में बनाएगी। इसके लिए दोनों का प्रदेश के
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सरकार और संगठन की जुगलबंदी कांग्रेस के मिशन रिपीट की राह हिमाचल में बनाएगी। इसके लिए दोनों का प्रदेश के ऐसे विधानसभा क्षेत्रों पर फोकस है, जहां पर पार्टी दो या इससे अधिक बार चुनाव जीतने में सफल नहीं हो पाई है। लिहाजा संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की कमजोरियों और हार के कारणों को जानने के साथ-साथ सीएम सुक्खू प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार के साथ मिलकर आगामी रणनीति बनाएंगे। यही वजह है कि ऐसे चुनाव क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं से मुख्यमंत्री का संवाद कार्यक्रम शुरू किया गया है। कार्यक्रम के तहत पच्छाद और चौपाल विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर चुके हैं, जबकि अब मुख्यमंत्री पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। सीएम के अधिकारिक आवास ओक ओवर में होने वाले इस कायक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार मौजूद रहेंगे।

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    इस दौरान कार्यकर्ताओं से विधानसभा क्षेत्र का पूरा फीडबैक लिया जाएगा। साथ ही क्षेत्र से लगातार पार्टी के हार के कारणों को भी जानने का प्रयास करेंगे। वहीं, कार्यकर्ताओं की समस्याओं और सरकार की योजनाओं की जमीनी हकीकत को भी सीएम जानेंगे। अहम है कि प्रदेश में पच्छाद, चौपाल, पांवटा साहिब, भरमौर, चुराह, सुलाह, सरकाघाट, सराज, दं्रग, बंजार, हमीरपुर सदर, झंडूता, जोगिंद्रनगर और नाचन आदि विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां पर कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है। लिहाजा सीएम सुक्खू के साथ कार्यकर्ताओं का सीधा संवाद ऐसे चुनाव क्षेत्रों में पार्टी को संजीवनी देने वाला साबित होगा।

    चुनावों की तैयारियां शुरू

    सुक्खू सरकार और संगठन ने प्रदेश के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद तीन माह में करने का फैसला लिया है, लेकिन सबसे पहले फोकस उन चुनाव क्षेत्रों पर है, जहां पार्टी को लगातार हार झेलनी पड़ रही है। इस कार्यक्रम से मिलने वाली फीडबैक के आधार पर ही पार्टी अगले वर्ष प्रदेश में होने वाली विधानसभा चुनावों में भाजपा की घेराबंदी की रणनीति बनाएगी। ऐसे विधानसभा चुनावों पर सरकार और संगठन के फोकस की एक बड़ी बजह यह भी मानी जा रही है कि सिटिंग पार्टी के खिलाफ एंटी इन्कम्बेंसी का भी एक फेक्टर रहता है। लिहाजा इसको अगले विधानसभा चुनावों में भुनाने की पूरी फिराक में कांग्रेस है।

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