HomeHealthहिमाचल के 37 दवा उद्योगों में बनीं 44 दवाएं जांच में फेल, देश भर में 157 दवाएं निकली सबस्टैंडर्ड

हिमाचल के 37 दवा उद्योगों में बनीं 44 दवाएं जांच में फेल, देश भर में 157 दवाएं निकली सबस्टैंडर्ड

देश की फार्मा हब के रूप में पहचान रखने वाले हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों पर एक बार फिर गुणवत्ता
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देश की फार्मा हब के रूप में पहचान रखने वाले हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों पर एक बार फिर गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से जारी मई 2026 के ड्रग अलर्ट में प्रदेश के 37 दवा उद्योगों में निर्मित 44 दवाएं और चिकित्सा उत्पाद गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। चिंताजनक बात यह है कि इनमें उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, संक्रमण, गैस्ट्रिक रोग, दर्द एवं सूजन जैसी आम और गंभीर बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं। इतना ही नहीं चार सिरप, चार मिसब्रांडेड उत्पाद तथा एक एंटीबायोटिक दवा को स्प्यूरियस (नकली) घोषित किया गया है। प्रदेश में निर्मित फेल दवाओं की संख्या देश में सबसे अधिक दर्ज की गई है। ड्रग अलर्ट के अनुसार देशभर में विभिन्न राज्यों में निर्मित कुल 157 दवा एवं चिकित्सा उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 111 उत्पाद राज्य स्तरीय औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं और 46 उत्पाद सीडीएससीओ की केंद्रीय एवं क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं की जांच में सब-स्टैंडर्ड पाए गए। हिमाचल प्रदेश में निर्मित 44 उत्पाद भी इसी सूची में शामिल हैं।

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    ये उत्पाद बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू और ऊना स्थित दवा उद्योगों में तैयार किए गए थे। जांच में फेल हुई दवाओं में आयरन सुक्रोज इंजेक्शन, रेबेप्राजोल इंजेक्शन, डाइक्लोफेनाक इंजेक्शन, ओन्डेनसेट्रॉन इंजेक्शन, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन, एमोक्सिसिलिन एवं क्लैवुलैनिक एसिड टैबलेट, सेफिक्सिम टैबलेट, सेफपोडॉक्सिम टैबलेट, टेल्मीसार्टन टैबलेट, रोसुवास्टेटिन टैबलेट, एटोरवास्टेटिन टैबलेट, गैबापेंटिन टैबलेट, प्रेगाबालिन टैबलेट, लेवोसिटिरिजीन टैबलेट, ओमेप्राजोल एवं इट्राकोनाजोल कैप्सूल, खांसी की विभिन्न सिरप, विटामिन सप्लीमेंट तथा मधुमेह और उच्च रक्तचाप की कई दवाएं शामिल हैं। इंजेक्शन और सिरप श्रेणी के उत्पादों में गुणवत्ता संबंधी खामियां नियामक एजेंसियों के लिए अधिक संवेदनशील मानी जाती हैं, क्योंकि इनका प्रभाव सीधे मरीजों के उपचार पर पड़ सकता है।

    रोजाना इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल

    गुणवत्ता जांच में फेल हुई दवाओं में बड़ी संख्या ऐसी दवाओं की है, जिनका इस्तेमाल लाखों मरीज नियमित रूप से करते हैं। उच्च रक्तचाप की टेल्मीसार्टन, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने वाली रोसुवास्टेटिन और एटोरवास्टेटिन, गैस्ट्रिक रोगों के लिए रेबेप्राजोल और ओमेप्राजोल, मधुमेह की दवाएं, एंटीबायोटिक श्रेणी की एमोक्सिसिलिन-क्लैवुलैनिक एसिड, सेफिक्सिम और सेफपोडॉक्सिम जैसी दवाओं का सूची में शामिल होना स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। ड्रग अलर्ट में सबसे गंभीर मामला एक एंटीबायोटिक दवा का सामने आया है, जिसे स्प्यूरियस (नकली) घोषित किया गया है। यह उत्पाद सिरमौर स्थित एक कंपनी के नाम से बाजार में पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि फेल केवल संबंधित बैच होते हैं, पूरी दवा या ब्रांड नहीं।

    नोटिस जारी, रिकॉल की प्रक्रिया शुरू

    राज्य दवा नियंत्रक डा. मनीष कपूर ने बताया कि गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए उत्पादों से संबंधित उद्योगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। संबंधित बैचों को बाजार से वापस लेने (रिकॉल) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है तथा मामलों की विस्तृत जांच की जा रही है। मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और गुणवत्ता मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं होगा।

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