Last updated: September 21st, 2026 at 04:43 am
royal-bengal-tigers-roar-echoes-in-himachal-pair-of-tigers-arrives-at-renuka-ji-tiger-enclosure-built-at-a-cost-of-₹1-68-crore/सिरमौर के रेणुका जी चिडिय़ाघर में रविवार को बाघ का 11 साल का इंतजार खत्म हो गया। महाराष्ट्र के गोरेवाड़ा से रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा करीब 1900 किलोमीटर का सफर तय कर दोपहर करीब एक बजे रेणुका जी चिडिय़ाघर पहुंचा। टाइगर के जोड़े के पहुंचते ही चिडिय़ाघर में वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण जुड़ गया। लगभग 48 घंटों के लगातार सफर के बाद महाराष्ट्र के नागपुर के गोरेवाड़ा जू से टाइगर का जोड़ा को फीजेंट एक्सचेंज आधार पर रेणुकाजी जू में लाया गया। मुख्य अरण्यपाल वन्य प्राणी विभाग प्रीति भंडारी, वन मंडल अधिकारी शाहनवाज भट्ट व अन्य अधिकारियों की देखरेख में टाइगर जोड़े को रेणुकाजी जू में लाया गया। महाराष्ट्र से लाए गए टाइगर के जोड़े में नर की उम्र करीब पांच साल और मादा की उम्र करीब तीन साल है। दोनों को सुरक्षित तरीके से रेणुका जी चिडिय़ाघर तक पहुंचाने के लिए सात सदस्यों की टीम करीब 1900 किलोमीटर का सफर तय कर यहां पहुंची। डा. शहनवाज, आईएफएस, उप अरण्यपाल शिमला वन्यप्राणी के नेतृत्व में टीम ने पूरे सफर के दौरान टाइगर के जोड़े की देखरेख की।
रॉयल बंगाल टाइगर के लिए रेणुका जी चिडिय़ाघर में पहले से ही आवासीय व्यवस्था तैयार की गई है। करीब 1.68 करोड़ रुपए की लागत से टाइगर के लिए एनक्लोजर और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं तैयार की जा चुकी हैं। अरण्यपाल वन्यप्राणी वृत्त शिमला दक्षिण प्रीति भंडारी ने बताया कि रॉयल बंगाल टाइगर के जोड़े का हिमाचल प्रदेश में आना वन्यप्राणी संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि टाइगर के आने से रेणुका जी चिडिय़ाघर में पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा और भविष्य में यह चिडिय़ाघर पर्यटकों के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होगा। डीएफओ वाइल्ड लाइफ विंग शाहनवाज भट्ट ने बताया कि इस वन्यजीव आदान-प्रदान की मंजूरी अगस्त, 2026 में मिली थी। इसके बाद प्रक्रिया शुरू की गई। वन्यजीव आदान-प्रदान के तहत हिमाचल प्रदेश के श्री रेणुका जी चिडिय़ाघर से रेड जंगल फाउल यानी जंगली मुर्गे का जोड़ा महाराष्ट्र के नागपुर स्थित टाइगर रेस्क्यू सेंटर को दिया गया। इसके बदले में महाराष्ट्र से रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा हिमाचल प्रदेश लाया गया।
रेणुकाजी में आने वाले नए मेहमानों का होगा नामकरण
रेणुकाजी जू में आने वाले वन्य प्राणियों का नामकरण भी वन्य प्राणी प्रेमी प्रेम से करते हैं। इससे पूर्व भी शेरों के नाम यहां निशू, ममता, अशोक इत्यादि रखे गए थे, जिन्हें विभागीय कर्मचारी और देखरेख करने वाले इन्ही नाम से पुकारते हैं, जिन्हें वन््रय प्राणी सुनते थे। वन्य प्राणी विभाग ने कई वन्य प्राणियों को गोद देने की भी पहल की है, जिसमें हिरण, बारहसिंगा इत्यादि शामिल थे, जिन्हें गोद लेने वाले आहार व अन्य सुविधाएं प्रदान करते हैं।
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